गुरूदेव की वैश्विक प्रार्थना

देश की माटी देश का जल
हवा देश की देश के फल
सरस बनें प्रभु सरस बनें
देश के घर और देश घाट
देश के वन और देश के बाट
सरल बनें प्रभु सरल बनें
देश के तन और देश के मन
देश के घर के भाई बहन
विमल बनें प्रभु विमल बनें
अनुवाद देश के शीर्षस्थ कवि पं भवानीप्रसाद मिश्र ने किया है.