भवानी भाई की प्रेरक - पंक्तियाँ
साधारणत: मौन अच्छा है…
किन्तु मनन के लिये !
जब शोर हो चारों ओर, सत्य के हनन के लिये !
तब तुम्हे अपनी बात,
ज्वलंत शब्दों में कहना चाहिये !
सिर कटाना पडे़ या न पडे़
तैयारी तो उसकी होनी चाहिये.
साधारणत: मौन अच्छा है…
किन्तु मनन के लिये !
जब शोर हो चारों ओर, सत्य के हनन के लिये !
तब तुम्हे अपनी बात,
ज्वलंत शब्दों में कहना चाहिये !
सिर कटाना पडे़ या न पडे़
तैयारी तो उसकी होनी चाहिये.
July 11, 2007 at 10:54 am
१५ अगस्त ,२००६ को इसी कविता से मैंने हिन्दी की अपनी पहली पोस्ट डाली थी।साधुवाद।