भवानी भाई की प्रेरक - पंक्तियाँ

साधारणत: मौन अच्छा है…

किन्तु मनन के लिये !

जब शोर हो चारों ओर, सत्य के हनन के लिये !

 तब तुम्हे अपनी बात,

ज्वलंत शब्दों में कहना चाहिये !

 सिर कटाना पडे़ या न पडे़

तैयारी तो उसकी होनी चाहिये.

One Response to “भवानी भाई की प्रेरक - पंक्तियाँ”

  1. अफ़लातून Says:

    १५ अगस्त ,२००६ को इसी कविता से मैंने हिन्दी की अपनी पहली पोस्ट डाली थी।साधुवाद।

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